लघुकथा कैसे नहीं लिखी जाए

By on मई 5, 2017 in Fiction, लेखन युक्तियाँ

किसी लघुकथा को कल्पना-साहित्य के अंश के रूप में परिभाषित किया गया है, जो किसी एक कथावस्तु के गिर्द घूमती है, जिसमें अधिक पात्र नहीं होते, तथा जिसमें शब्दों की संख्या सीमित होती है। यह सत्य है, परंतु लघुकथा केवल शब्दों की कल्पना-साहित्य के एक परिमित मात्रा से भी कुछ अधिक होती है। किसी लघुकथा का पाठकों पर वही प्रभाव होना चाहिए जो किसी उपन्यास का होता है – केवल इस अंतर के साथ कि यह आकार में बहुत छोटी है। इसके प्रभाव-स्वरूप पाठक को जो झांकी मिलती है जो उन्हीं पात्रों से लिप्त तथा उसी जगत में अवस्थापन के समान है। और यदि पाठक वह उपन्यास चाहता है, तब आपने वास्तव में बहुत अच्छा कार्य किया है। तथापि, कुछ गलतियाँ हैं जिन्हें करने में नए लेखक प्रवण होते हैं। तथापि, हमने निम्नलिखित वह चीजें एकत्रित की हैं जिनसे लघुकथा लिखते समय आपको बचना चाहिए।

1. उपन्यास को जमाना

प्रत्येक कहानी किसी अवधारणा से आरंभ होती है। इस पर निर्भर करते हुए कि आपकी अवधारणा कितनी बड़ी है, आप इसे किसी उपन्यास, या लघुकथा, या लघु उन्यास के लिए अपना सकते हैं। यहाँ कुंजी है अपनी अवधारणा के लिए सही माध्यम ढूँढ़ना। किसी उपन्यास को किसी लघुकथा में अटाने के लिए प्रयास नहीं कीजिए – आप पाठक को बहुत अधिक अनावश्यक सूचना देते रह जाएँगे। इसके अतिरिक्त, उपन्यास की लंबाई के कथानक को किसी लघुकथा में ठूँसना केवल कथानक में जल्दबाजी किया जाना या अपूर्ण प्रतीत होगा। यही कारण है कि आपके लिए यह निश्चित करना आवश्यक है कि आपकी अवधारणा को लघुकथा के लिए अपनाया जा सकता है या नहीं। यदि यह बहुत बड़ा है तब लघुकथा के बदले कोई लघु उपन्यास या उपन्यास लिखिए।

2. खराब आरंभ का उपयोग

बहुत से ऐसे आरंभ हैं जो पाठकों, संपादकों और अभिकर्ताओं का पढ़ना बंद करा देंगे। उनमें से कुछ सार्वलौकिक रूप से घृणा के पात्र हैं, जैसे मौसम से आरंभ किया जाना, या पात्र का सुबह नींद से जगना। निश्चित रूप से इसका अर्थ यह नहीं है कि आप उनका उपयोग कर ही नहीं सकते (बहुतेरे कल्पना-साहित्य लेखन “नियम” लेखकों के द्वारा तोड़े जा चुके हैं, और बहुत ही प्रतिभाशाली शैली में)। उदाहरण के लिए, मौसम का उपयोग मनोदशा तैयार करने के लिए तथा यह दर्शाने के लिए किया जा सकता है कि यह आपके पात्र को कैसे प्रभावित करता है। दूसरी ओर, सुबह आपके पात्र के जगने के बाद, एक अंश है जिसमें, अपरिहार्य रूप से, उनके प्रभात-नित्यकर्मों के संबंध में लिखना पड़ेगा, जो अधिकांश पाठकों को उबाऊ लगेगा।

3. बहुत अधिक विकास

किसी लघुकथा को जितना संभव हो सके चरमोत्कर्ष के निकट आरंभ होना आवश्यक है। कोई उपन्यास जगत, पात्रों का विकास करते हुए और जमीन से कहानी का निर्माण करते हुए मंथर मार्ग से ले सकता है। तथापि, किसी लघुकथा में, जितना भी संभव हो सके आपको शीर्ष से आरंभ करने की, और अपने पात्रों तथा उनकी पृष्ठभूमि के बारे में पाठकों को सूचना देने की आवश्यकता है जिससे आरंभ से अंत तक वे कहानी को समझ सकें और उसका आनंद ले सकें। नहीं, आपको अपने पात्रों की सही आयु, रूप तथी जीवनवृत्त कहने की कोई भी आवश्यकता नहीं है – तथापि, यदि यह कथानक के दौरान स्वाभाविक रूप से आएं, तब निश्चित रूप से आपको कहना चाहिए।

4. कथानक भूल जाना

कथानक महत्वपूर्ण है। कहानी को कथानक की आवश्यकता है। यह एक गलती है जिसे करने के लिए नए लेखक प्रवृत्त होते हैं। कोई लघुकथा किसी वस्तु या स्थान का वर्णन नहीं है, और यह किसी पात्र के जीवन में कोई सवेरा नहीं है जहाँ वे अपने जीवन के संबंध में चिंतन करते हैं। यह संवेदनशीलता नहीं है, यह मनोदशा नहीं है। किसी लघुकथा में पात्र, दृश्य, घटनाक्रम, ठीक किसी उपन्योस के समान होते हैं। दूसरे शब्दों में, इसमें एक कथानक होता है। कथानक संक्षिप्त हो सकता है, किसी एकल द्व्न्द्व के गिर्द घूमता हो सकता है, तथा अचानक प्रकटीकरण और समाधान की ओर ले जा सकता है, परंतु फिर भी यह एक कथानक है। कोई लघु कथा जिसका कथानक कसा हुआ है, जहाँ प्रत्येक वाक्य तनाव में वृद्धि करता है और कथानक को आगे बढ़ाते हुए कोई महत्वपूर्ण चीज कहता है, उस कहानी से हमेशा अधिक मनोरंजक होता है जो किसी पात्र के मन में रहती है, तथा उसकी मनोदशा के गिर्द घूमती है।

5. संवाद से बचना

लोग बातें करते हैं, और आपके पात्रों को भी करनी चाहिए। कोई लघुकथा केवल घटनाओं का कोई संवादहीन ब्यौरा नहीं हो सकती। किसी लघुकथा में संवाद संक्षिप्त तथा मुद्दे के अनुसार होने चाहिए। इसे प्रभावी होने की आवश्यकता है। यह साधारणतः दो पात्रों के बीच घटनाक्रम का एक अन्य रूप है जो द्व्न्द्व की सृष्टि कर सकता है। यह आपके पात्रों का सच्चा स्वरूप अनावृत्त करेगा। अच्छा संवाद मनोदशा स्थापित करने में सहायता कर सकता है, और कथानक बिंदुओं का स्पष्टीकरण भी कर सकता है, और इसलिए लघुकथा में इससे कभी भी बचना नहीं चाहिए।

Georgina Roy wants to live in a world filled with magic. As an art student, she’s moonlighting as a writer and is content to fill notebooks and sketchbooks with magical creatures and amazing new worlds. When she is not at school, or scribbling away in a notebook, you can usually find her curled up, reading a good urban fantasy novel, or writing on her laptop, trying to create her own.

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